कोई इंसान नहीं बनना चाहता, सब हिन्दू, मुसलमान, बौद्ध बनना चाहते हैं। मानवता के रक्षक कहीं दिखाई नहीं दे रहे...दिखते हैं तो सिर्फ सनातनी,दलित,मुस्लिम, बौद्ध
सब जाति-धर्म में बँटकर अपने आपको ही श्रेष्ठ मानने का दम्भ पाल रहे हैं। असलियत यही है कि विश्व गुरु भारत आज रसातल में जाने को अग्रसर है।
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